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Geranium Plantation & Geranium Oil Production Business

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Description:

Introduction :

          गेरियम (वैज्ञानिक नाम: Pelargonium graveolens) एक सुगंधित पौधा है जो मूल रूप से अफ्रीका का है। भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में होती है। इस पौधे की खेती का मुख्य उद्देश्य इससे निकलने वाले आवश्यक तेल का उत्पादन करना है, जिसकी बाज़ार में बहुत मांग है।

 

Scope :

1) बढ़ती मांग: भारत में गेरियम तेल की मांग हर साल 149 टन है, जबकि उत्पादन केवल 5 टन है। इस बड़े अंतर को पूरा करने के लिए भारत को बड़ी मात्रा में तेल आयात करना पड़ता है, जिससे किसानों के लिए एक बड़ा अवसर पैदा होता है।
2) कम लागत, उच्च मुनाफा: गेरियम की खेती में अन्य फसलों की तुलना में पानी और रासायनिक खाद की आवश्यकता कम होती है। प्रति एकड़ ₹80,000 की लागत से लगभग ₹3 लाख तक का शुद्ध लाभ कमाया जा सकता है।
3) बहुउद्देशीय उपयोग: गेरियम तेल का उपयोग सिर्फ इत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग कॉस्मेटिक्स, अरोमाथेरेपी, साबुन और दवाइयाँ बनाने में भी होता है। इसकी पत्तियों से बने उत्पादों का उपयोग स्वास्थ्य लाभों के लिए भी किया जाता है।
4) बहु-वर्षीय फसल: गेरियम एक बार बोने के बाद कई सालों तक फसल देता है। पहली कटाई के बाद हर 3-4 महीने में इसकी कटाई की जा सकती है, जिससे किसानों को सालभर आय होती रहती है।
5) विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में अनुकूलता: गेरियम को विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में उगाया जा सकता है, खासकर हल्की जलवायु और कम नमी वाले क्षेत्रों में, जहाँ वार्षिक वर्षा 100 से 150 सेमी हो।

 

Demand :

गेरियम तेल की मांग में वृद्धि के कई प्रमुख कारण हैं:
1) घरेलू मांग और आयात: भारत में गेरियम तेल की वार्षिक खपत लगभग 149 टन है, जबकि उत्पादन केवल 5 टन है। इस बड़े अंतर को पूरा करने के लिए भारत को बड़ी मात्रा में गेरियम तेल आयात करना पड़ता है, जिससे किसानों के लिए उत्पादन बढ़ाने का एक बड़ा अवसर पैदा होता है।
2) बहुउद्देशीय उपयोग: गेरियम तेल का उपयोग विभिन्न उद्योगों में होता है, जिससे इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। इसका उपयोग इत्र, सौंदर्य प्रसाधन, साबुन, दवाइयाँ और अरोमाथेरेपी में होता है।
3) स्वास्थ्य जागरूकता: स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण लोग प्राकृतिक और हर्बल उत्पादों को पसंद कर रहे हैं। गेरियम तेल में जीवाणुरोधी, रोगाणुरोधी और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो इसे त्वचा की समस्याओं और तनाव को कम करने के लिए एक लोकप्रिय विकल्प बनाते हैं।

 

Future :

गेरियम तेल उत्पादन का भविष्य भारत में बहुत आशाजनक है।
1) सरकारी सहायता: सरकार अरोमा मिशन जैसी योजनाओं के तहत सुगंधित फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों से हटकर गेरियम जैसी लाभदायक फसलों को अपनाने में मदद मिल रही है।
2) उच्च मुनाफा: गेरियम तेल की कीमत ₹15,000 से ₹20,000 प्रति लीटर तक है, जिससे यह एक बहुत ही लाभदायक व्यवसाय बन जाता है। एक बार पौधा लगाने के बाद, यह 4-5 साल तक पैदावार देता है, जिससे किसानों को सालभर नियमित आय होती रहती है।
3) तकनीकी नवाचार: वैज्ञानिकों ने गेरियम के पौधों की पौध तैयार करने के लिए कम लागत वाली तकनीकें विकसित की हैं, जिससे किसानों के लिए इसकी खेती करना आसान हो गया है।

 

Machinery : 

1) भाप आसवन इकाई (Steam Distillation Unit):
2) ट्रेक्टर (Tractor)
3) पौध लगाने के उपकरण
4) कटाई के उपकरण
5) स्टोरेज टैंक और बोतलें

 

Raw Material :

1) गेरियम के पौधे
2) पानी
3) उर्वरक (Fertilizers)
4) जलाऊ लकड़ी या ईंधन
5) पैकेजिंग सामग्री

 

Investment :

Capital Investment : Shed = 4 to 5 lakhs
Machinery = 5,00,000 – 7,50,000/-
Place Required : 200 – 300 sq ft
Government Subsidy : Available
Margins = Rs. 100 – 200 per kg B2B

 

अधिक जानकारी के लिए 7272971971 पर संपर्क करें।

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August 21, 2025

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